सवाई माधोपुर जिले की शानदार कविता
मैं हूं सवाई माधोपुर
15 लाख जनसंख्या मेरी और
10 हजार वर्ग किलोमीटर क्षैत्रफल मेरा,
संत्रासौ तिरेसठ में माधोसिंह ने सवाई-माधोपुर बसाया ,
वीर प्रतापी राजा हम्मीर देव चौहान ने मेरा मान बढ़ाया।
सन् 1973 में टाइगर प्रोजेक्ट आया,
सबसे पहला बाघ अभ्यारण रणथंभौर कहलाया ।
दहाड़ते बाघ नाचते मोर यहां ,
जंगली सुअर और सांभर हिरण ।
सुंदर राजबाग झील यहां ,
और विराजते यहां त्रिनेत्र गजानन।
वो सात पहाड़ी से घिरा दुर्ग मेरा रणथंभौर कहावे,
अबुल फजल के शब्दो में जो बख्तरबंद दुर्ग कहावे ,
देख के झरना और विहंगम अरावली को दर्शन पावे।
पृथ्वीराज पुत्र गोविंद सिंह जठे को राज कहावे ,
रणथम्भौर का राजा आज भी हम्मीर चौहान कहावे ।
चौथ माँ का दरबार अलग कहानी केहवे है,
आज भी गाँव की मिट्टी में खुशहाली रहवे है ।
राजस्थान को पहलो शाको जी धरती पर फूट्यो हो ,
जौहर से दर्द भी सब पैल्या रणथंभौर पे टुट्यो हो ।
रणथंभौर में बादल फुल जोगी महल
और वहां नवलखा दरवाजा देखो,
पदमला तालाब शिव गणेश मंदिर
और यहां 32 खंभों की छतरी देखो ,
हीरामन शिवाड़ और जगदीश मेला
और यहां चौथ माता का मेला देखो
गंगापुर में धुंधलेश्वर और कल्याणजी मंदिर
और यहां चमत्कारी ऋषभदेव के दर्शन पावो,
शिवाड़ में घुश्मेश्वर ज्योतिर्लिंग और
रामेश्वर त्रिवेणी संगम पे शिवजी के गुण गावो,
अरणेश्वर महादेव सप्तकुंड यहां
चौथ बरवाड़े में मीन भगवान के दर्शन पावो,
खंडार का किला प्रसिद्ध यहां
कदे पावणा बनके म्हारे सवाई-माधोपुर आवो।
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