खम्माघणी-सा, मैं सूर्य नगरी जोधपुर बोल रहा हूं।
मैं मारवाड़ की राजधानी, अपनी गौरव गाथा सुना रहा हूं।
1459 ईस्वी में राव जोधा ने मुझको बसाया,
सूर्यनगरी और मारवाड़ की नई राजधानी मैं कहलाया।
मैं हूं राजस्थान का उच्च न्यायालय और
थार मरुस्थल का प्रवेश द्वार कहलाया।
मालदेव राठौड़ जैसा वीर यहां,
यहां पले है वीर कुंपा और जैता,
सुमेल रण में शेरशाह घबराकर बोला,
मुठ्ठी भर बाजरे के लिए दिल्ली को देता,
होवे यहां मालदेव और चंद्रसेन वीरों का गुणगान,
नागणेची माता हैं यहां, राठौड़ो की शान,
विश्व प्रसिद्ध है जहां, खेजड़ली का बलिदान,
सिर कटे पर रूख रहे, तो भी सस्तो जाण,
अमृता बाई और तीन सौ तिरसठ लोगों ने,
पेड़ों के खातिर न्योछावर किए अपने प्राण
चिड़ियाटुंक पहाड़ी पर, ऊंचा है मेहरानगढ़ किला,
राव जोधा ने इसे बनाया, दिखे जहां से पूरा जिला,
यहां सिलेह दौलतखाना, और मोती शीश फूलमहल,
जसवंत थड़ा है यहां, जैसे हों ताजमहल,
सुंदर नजारे यहां, सुंदर है उम्मेद महल,
बालसमंद और कायलाना का मीठा जल,
42 लाख से ज्यादा जनसंख्या मेरी,
22 हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल।
कोलू गाँव फलोदी में भरता पाबूजी राठौड़ का मेला,
भादवा सुदी दशमी को भरता खेजड़ली वृक्ष मेला।
झुके ना कभी यहां की पगड़ी ,
रुके ना कभी घंटाघर की घड़ी ,
खाते लोग प्याज कचौरी मिर्चीवड़ी ।
मुझे कहते हैं नीला शहर ,
ओंसिया है मंदिरो का नगर,
मंडोर में था मंदोदरी का घर,
सरदार मार्केट में लोगो का कहर,
ऊंची उठती उम्मेदसागर की लहर,
आई माता व लुटियाल माता मंदिर यहां
चामुंडा मां का मन्दिर है सुंदर,
धूमधाम से मनाये मारवाड़ महोत्सव,
छाए चारों ओर खुशियों की लहर,
धोरा री धरती की बात निराली,
भगवान समान यहां मेहमान,
आओ करे इसका गुणगान,
जय मारवाड़ जय राजस्थान।
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