बूंदी जिले की कविता • Bundi Lyrics Poem in Hindi • मैं हूं नखराली बूंदी

बूंदी जिले की शानदार पोएम या कविता पढ़े।

बूंदी जिले का संपूर्ण इतिहास, भूगोल, कला, संस्कृति और पर्यटन स्थल पर कविता है।




मैं हूं बूंदी

12 लाख जनसंख्या मेरी 

और 55 सौ वर्ग किलोमीटर क्षैत्रफल मेरा, 

बूंदा मीणा ने की स्थापना, 

मैं छोटी काशी बूंदी हूं ,

नाम छोटा गलिया छोटी, 

फिर भी बहुत कुछ समाए बैठी हूं। 

कहते मुझे परिंदो का स्वर्ग

 और मैं हि वृंदावती हूं।

 यहां हाड़ा चौहान वंश और

साम्राज्य के संस्थापक देवा हाड़ा हैं, 

प्रसिद्ध वीर राजा बीरसिंह , रतनसिंह , 

रावसुर्जन, अनिरुद्ध और बुद्ध सिंघ हाड़ा हैं । 


तारों के नीचे बसा तारागढ़ अरावली है जिसकी दिवारे,

 रानी जी कि बावड़ी है यहां शहर के चार दिशाओं में चार द्वारे ।

यहां हैं मोती महल बादल महल ,

यहां हैं हाथीपोल और फुलमहल । 

तो एक और है सुखमहल , 

एक और सुंदर सागर नवल, 

भुराजी का कुंड दभाई कुंड और गढ़ पैलेस में सुंदर राजमहल। 

कहते मुझे बावड़ीयों का शहर अनेको बावड़ियों में लबालब जल, 

गुलाब व्यास चंपा भिस् तिया और अनार कली बावड़ी में पानी करता कलकल।

 गरदड़ा व गुढ़ा बांध और नवलखा व दुगारी झील का पानी करता हलचल ।


फूल सागर और जैत सागर यहां ,

कनक सागर और नगर सागर जहां,

 84 खंभों की छतरी है यहां ,

 अद्भुत कलाकृति है जहां, सांपो की शरणस्थली जहां ,

वो रामगढ़ विषधारी अभ्यारण यहां ।

दुगारी पंछी अभ्यारण यहां ,

प्रथम सिमेंट कारखाना लाखेरी यहां।

 प्रसिद्ध पशु-पक्षियो के चित्र वाली बूंदी चित्रशैली और चित्रशाला है।

 सुंदर केसरबाग की छतरियां व पांडवों की गुफा और यज्ञशाला है।

 प्रसिद्ध है तलवास रामेश्वर और भीमलत झरने का सुंदर नजारा , 

प्रसिद्ध है शिकारबुर्ज नैनवा किला और इंद्रगढ़ किला प्यारा, 

हिंडौली में लकड़ेश्वर महादेव मंदिर और रामसागर व हिंडौली किला न्यारा।   


बांसी दुगारी में तेजाजी धाम, 

इंद्रगढ़ में बिजासन माताजी धाम ,

केशवरायपाटन में केशवरायजी धाम,

विषो का संसार है जहां विष को पीने वाला रामेश्वर धाम ,

कजली तीज में भरता विशाल मेला 

विदेशी भी मनाते है उत्सव बड़ी धूमधाम।


सूर्यमल्ल मिश्रण का हुआ जनम यहां, 

नानक भील हुए शहीद यहां , 

24 जून को भरता विशाल मेला 

कहते है उसे बूंदी उत्सव यहां,

 यूंही नही नखराली बूंदी को 

दूसरी काशी कहते यहां।



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