चित्तौड़गढ़ की शानदार कविता • I am Chittorgarh • Lyrics Poem

दोस्तों आज हम पढ़ेंगे राजस्थान का गौरव और शुर वीरों की धरती चित्तौड़गढ़ की शानदार कविता।
शोर्य और भक्ति का शहर चित्तौड़ की कविता जरूर पढ़ें
#Chittorgarh




 मैं हूं चित्तौड़गढ़

78 हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल 

और 17 लाख जनसंख्या मेरी,

यहां पले है कई महापुरुष और 

वीर वीरांगनाओं की धरती मेरी , 


त्याग तपस्या शौर्य और भक्ति का शहर,

मैं राजस्थान का गौरव कहलाया ,

चित्रांगद मौर्य ने चित्रकूट दुर्ग बनाया, 

मैं शुर वीरों का शहर कहलाया,

बप्पा-रावल रत्नसिंह कुम्भा और सांगा 

और महाराणा प्रताप ने मेरा मान बढ़ाया,

 गौरा -बादल जयमल-पत्ता और 

कल्ला जी के बलिदान ने मेरा गौरव बढ़ाया,

 हुए थे यहां 3 जौहर और 3 साके,

 मैनें मेवाड़ का इतिहास रचाया 


मै चित्तौड़गढ़ बोल रहा हूं,

वीर वीरांगनाओं के गीत गा रहा हूं ,

सुंदर पद्मिनी महल,

वो कृष्ण दिवानी मीरा मंदिर, 

उत्कृष्ट कुंभा महल, 

भव्य समिद्धेश्वर महादेव का मंदिर, 

विशाल सूरजकुण्ड और ऊंचा कीर्तिस्तम्भ ,

सुंदर कुंभश्याम मंदिर और यहां विजय स्तंभ ,

भैंसरोड़गढ़ यहां और रावतभाटा ऊर्जा स्थल ,

गोरा-बादल की घुमरें और महासती जौहर स्थल ,

राजस्थानी हरिद्वार है मातृकुंडिया ,

मंडफिया में विराजे सेठ सांवरिया, 

सुंदर विशाल और मजबूत दुर्ग है यह भईया ,

हां, गढ़ तो चित्तौड़ का बाकी सब गढ़य्या।


आठवीं सदी में हुए यहां वीर बप्पा रावल,

महाराणा कुम्भा ने बनाए यहां कई महल,

महाराणा सांगा ने बढ़ाया मेरा मान,

मै ही हूं उदयसिंह का जन्मस्थान,

शुर वीरों की जननी है राजस्थान


जय महाराणा प्रताप, जय मेवाड़ 





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