बीकानेर की कविता • Bikaner Poem •

हैलो दोस्तों, हमारे ब्लॉग में आपका स्वागत है। बीकानेर जिले का संपूर्ण इतिहास और भूगोल, कला और संस्कृति, पर्यटन और संसाधन और करणी माता की शानदार कविता जरूर पढ़ें। 



 मैं हूं बीकानेर

एक खूबसूरत अलमस्त नगर , 

खुबसूरत है यहां रामपुरिया हवेली 

और यहां देवीकुंड सागर, 

एशिया की सबसे बड़ी ऊन की मंडी यहां 

कहते मुझे ऊन का घर,

27 हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल मेरा 

कहते मुझे ऊंटो का नगर, 

27 लाख जनसंख्या मेरी 

और मै हूं चूहों वाली देवी का नगर, , 

भंडासर जैन मंदिर यहां 

और यहां है लालगढ़ पैलेस बहुत सुंदर, 

ऊंट अनुसंधान केन्द्र यहां 

और यहां सादुलसिंघ म्यूजियम सुंदर

छोटी काशी कहते बीकाणे के परकोटे को,

 सम्मान बड़े का होता है प्यार मिलता छोटे को

सन् 1488 में राव बिकाजी ने ठान लिया

बीकानेर बसा कर फिर तो पुरखों का सम्मान किया,

वीर पराक्रमी राव रायसिंह ने भी मेरा सर ऊंचा किया,

रायसिंह ने जूनागढ़ तो अनूप सिंह ने अनुपमहल दिया

सात द्वार के मध्य बसा है अपनापन भरपूर मिले,

हर बाशिंदा बीकाणे का मस्ती में ही चूर मिले,

कहते मुझको प्रदेश जांगल,

सुंदर दिखता लक्ष्मी निवास महल,

पहनके धोती पगड़ी और खाके भुजिया, 

खुशियां मनाते लोग यहां हर पल,

ना कोई नदी ना कोई जंगल,

फिर भी यहा सब कुशल मंगल,


जिसके एक तरफ करणी माँ एक तरफ भैरुनाथ है,

एक तरफ पुनरासर बाबा सब भक्तों के साथ है,

मुकाम में जम्भाजी का मेला देशनोक में करणी माता हैं, 

इन देवों के साथ हमारा जन्म जन्म का नाता है,

बिकाणे में जो भी आता उसका मन रम जाता है, 

जसनाथजी का जस गावे वो गांव कतरियासर है,

कपिल मुनि का आश्रम जहां वो कोलायत नगर है , 

यहां राव लूणकरण जी की झील लूणकरणसर है,

गजनेर और कोलायत झील की शांत लहर हैं,

ऊंट महोत्सव में नाचता झूमता सारा शहर है। 



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